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गणित कक्षा 10 – अध्याय 1: वास्तविक संख्याएँ – विस्तृत नोट्स | विस्तृत अध्ययन

Posted on April 7, 2026 by Anshul Gupta

गणित कक्षा 10 – अध्याय 1: वास्तविक संख्याएँ

Table of Content
  • 1. गणित कक्षा 10 – अध्याय 1: वास्तविक संख्याएँ
  • 2. वास्तविक संख्याएँ क्या हैं?
    • 2.1. वास्तविक संख्याओं की परिभाषा
    • 2.2. वास्तविक संख्याओं के उदाहरण
  • 3. परिमेय संख्याएँ
    • 3.1. परिमेय संख्याओं के गुण
    • 3.2. परिमेय संख्याओं के उदाहरण
  • 4. अपरिमेय संख्याएँ
    • 4.1. अपरिमेय संख्याओं के गुण
    • 4.2. अपरिमेय संख्याओं के उदाहरण
  • 5. यूक्लिड विभाजन प्रमेयिका
    • 5.1. यूक्लिड विभाजन प्रमेयिका का कथन
    • 5.2. यूक्लिड विभाजन प्रमेयिका का उपयोग
    • 5.3. उदाहरण
  • 6. अभाज्य गुणनखंडन प्रमेय
    • 6.1. अभाज्य गुणनखंडन प्रमेय का कथन
    • 6.2. अभाज्य गुणनखंडन प्रमेय का उपयोग
    • 6.3. उदाहरण
  • 7. HCF और LCM
    • 7.1. HCF ज्ञात करना
    • 7.2. LCM ज्ञात करना
    • 7.3. HCF और LCM के बीच संबंध
  • 8. दशमलव प्रसार
    • 8.1. दशमलव प्रसार के प्रकार
    • 8.2. परिमेय और अपरिमेय संख्याओं का दशमलव प्रसार
  • 9. वास्तविक संख्याओं पर संक्रियाएँ
    • 9.1. जोड़, घटाव, गुणा और भाग
    • 9.2. गुणधर्म
  • 10. घातांक और करणी
    • 10.1. घातांक के नियम
    • 10.2. करणी
    • 10.3. करणी के नियम
  • 11. अध्याय का सारांश
  • 12. निष्कर्ष
  • 13. अतिरिक्त अध्ययन के लिए प्रश्न
    • 13.1. लघु उत्तरीय प्रश्न
    • 13.2. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
  • 14. बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
    • 14.1. MCQs के उत्तर

नमस्ते दोस्तों! इस लेख में, हम कक्षा 10 के गणित के पहले अध्याय, वास्तविक संख्याओं के बारे में विस्तार से जानेंगे। यह अध्याय गणित की दुनिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो संख्याओं के विभिन्न प्रकारों और उनके गुणों से संबंधित है। हम वास्तविक संख्याओं की परिभाषा, उनके प्रकार, गुणधर्म, और उनसे संबंधित महत्वपूर्ण अवधारणाओं को समझेंगे। यह अध्याय आपको गणितीय समस्याओं को हल करने में मदद करेगा और आगे की पढ़ाई के लिए एक मजबूत आधार तैयार करेगा। तो चलिए, शुरू करते हैं!

वास्तविक संख्याएँ क्या हैं?

वास्तविक संख्याएँ (Real Numbers) वे संख्याएँ हैं जिन्हें हम संख्या रेखा पर दर्शा सकते हैं। इसमें परिमेय और अपरिमेय दोनों प्रकार की संख्याएँ शामिल हैं। वास्तविक संख्याएँ हमारे दैनिक जीवन में भी बहुत उपयोगी हैं, जैसे कि तापमान, दूरी, वजन आदि को मापने में।

वास्तविक संख्याओं की परिभाषा

परिभाषा:
वास्तविक संख्याएँ, संख्याओं का एक ऐसा समूह हैं जिनमें परिमेय संख्याएँ (Rational Numbers) और अपरिमेय संख्याएँ (Irrational Numbers) दोनों शामिल होती हैं। सरल शब्दों में, वास्तविक संख्याएँ वे हैं जिन्हें हम संख्या रेखा पर दर्शा सकते हैं।

वास्तविक संख्याओं के उदाहरण

वास्तविक संख्याओं के कुछ उदाहरण इस प्रकार हैं:

  • परिमेय संख्याएँ: 1, -2, 3/4, 0.5, 0
  • अपरिमेय संख्याएँ: √2, π (पाई), √3

परिमेय संख्याएँ

परिमेय संख्याएँ (Rational Numbers) वे संख्याएँ हैं जिन्हें p/q के रूप में व्यक्त किया जा सकता है, जहाँ p और q पूर्णांक हैं और q शून्य के बराबर नहीं है। परिमेय संख्याओं में भिन्न, पूर्णांक और दशमलव संख्याएँ शामिल हैं जो समाप्त हो जाती हैं या दोहराई जाती हैं।

परिमेय संख्याओं के गुण

  • परिमेय संख्याएँ जोड़, घटाव, गुणा और भाग के अंतर्गत बंद होती हैं (अर्थात, परिमेय संख्याओं पर इन संक्रियाओं को करने पर हमें हमेशा एक परिमेय संख्या मिलती है)।
  • परिमेय संख्याएँ क्रमविनिमेय (commutative) और साहचर्य (associative) गुणों का पालन करती हैं।
  • परिमेय संख्याओं का योगात्मक तत्समक (additive identity) 0 है, और गुणात्मक तत्समक (multiplicative identity) 1 है।

परिमेय संख्याओं के उदाहरण

परिमेय संख्याओं के कुछ उदाहरण इस प्रकार हैं:

  • 2/3
  • -5/7
  • 4 (जिसे 4/1 के रूप में लिखा जा सकता है)
  • 0.25 (जिसे 1/4 के रूप में लिखा जा सकता है)

अपरिमेय संख्याएँ

अपरिमेय संख्याएँ (Irrational Numbers) वे संख्याएँ हैं जिन्हें p/q के रूप में व्यक्त नहीं किया जा सकता है, जहाँ p और q पूर्णांक हैं। अपरिमेय संख्याओं में वे संख्याएँ शामिल हैं जो दशमलव रूप में न तो समाप्त होती हैं और न ही दोहराई जाती हैं।

अपरिमेय संख्याओं के गुण

  • अपरिमेय संख्याएँ जोड़, घटाव, गुणा और भाग के अंतर्गत बंद नहीं होती हैं (अर्थात, अपरिमेय संख्याओं पर इन संक्रियाओं को करने पर हमेशा एक अपरिमेय संख्या नहीं मिलती है)।
  • अपरिमेय संख्याओं को दशमलव रूप में सटीक रूप से व्यक्त नहीं किया जा सकता है।

अपरिमेय संख्याओं के उदाहरण

अपरिमेय संख्याओं के कुछ उदाहरण इस प्रकार हैं:

  • √2 (वर्गमूल दो)
  • π (पाई)
  • √3 (वर्गमूल तीन)
  • e (घातीय स्थिरांक)

यूक्लिड विभाजन प्रमेयिका

यूक्लिड विभाजन प्रमेयिका (Euclid’s Division Lemma) एक महत्वपूर्ण प्रमेय है जो दो धनात्मक पूर्णांकों के लिए विभाजन की प्रक्रिया को परिभाषित करती है। यह प्रमेयिका दो पूर्णांकों के बीच संबंध स्थापित करती है और इसका उपयोग महत्तम समापवर्तक (HCF) ज्ञात करने के लिए किया जाता है।

यूक्लिड विभाजन प्रमेयिका का कथन

कथन:
दो धनात्मक पूर्णांकों a और b के लिए, ऐसे अद्वितीय पूर्णांक q और r विद्यमान हैं कि a = bq + r, जहाँ 0 ≤ r < b। यहाँ, a भाज्य है, b भाजक है, q भागफल है, और r शेषफल है।

यूक्लिड विभाजन प्रमेयिका का उपयोग

यूक्लिड विभाजन प्रमेयिका का उपयोग दो संख्याओं का महत्तम समापवर्तक (HCF) ज्ञात करने के लिए किया जाता है। HCF वह सबसे बड़ी संख्या है जो दी गई दोनों संख्याओं को पूरी तरह से विभाजित करती है।

यूक्लिड विभाजन प्रमेयिका का उपयोग करके HCF ज्ञात करने की प्रक्रिया:
1बड़ी संख्या को छोटी संख्या से विभाजित करें।

→

2विभाजन प्रमेयिका का उपयोग करके शेषफल ज्ञात करें।

→

3यदि शेषफल शून्य नहीं है, तो भाजक को शेषफल से विभाजित करें।

→

4इस प्रक्रिया को तब तक दोहराएँ जब तक कि शेषफल शून्य न हो जाए।

→

5अंतिम भाजक ही HCF है।

उदाहरण

मान लीजिए हमें 12 और 18 का HCF ज्ञात करना है।

  1. 18 = 12 × 1 + 6
  2. 12 = 6 × 2 + 0

अतः, 12 और 18 का HCF 6 है।

अभाज्य गुणनखंडन प्रमेय

अभाज्य गुणनखंडन प्रमेय (Fundamental Theorem of Arithmetic) संख्याओं के सिद्धांत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह प्रमेय बताता है कि प्रत्येक भाज्य संख्या को अभाज्य संख्याओं के गुणनफल के रूप में अद्वितीय रूप से व्यक्त किया जा सकता है।

अभाज्य गुणनखंडन प्रमेय का कथन

कथन:
प्रत्येक भाज्य संख्या को अभाज्य संख्याओं के गुणनफल के रूप में व्यक्त किया जा सकता है, और यह गुणनखंडन अद्वितीय होता है, गुणनखंडों के क्रम को छोड़कर।

अभाज्य गुणनखंडन प्रमेय का उपयोग

अभाज्य गुणनखंडन प्रमेय का उपयोग कई कार्यों के लिए किया जाता है, जैसे कि:

  • किसी संख्या का अभाज्य गुणनखंडन ज्ञात करना।
  • दो संख्याओं का HCF और LCM ज्ञात करना।
  • यह जांचना कि कोई संख्या परिमेय है या अपरिमेय।

उदाहरण

संख्या 36 को अभाज्य गुणनखंडों के रूप में इस प्रकार व्यक्त किया जा सकता है: 36 = 2 × 2 × 3 × 3 = 2² × 3²

HCF और LCM

महत्तम समापवर्तक (HCF – Highest Common Factor) दो या दो से अधिक संख्याओं में सबसे बड़ी संख्या है जो उन सभी संख्याओं को पूरी तरह से विभाजित करती है। लघुत्तम समापवर्त्य (LCM – Least Common Multiple) दो या दो से अधिक संख्याओं में सबसे छोटी संख्या है जो उन सभी संख्याओं से पूरी तरह से विभाज्य है।

HCF ज्ञात करना

HCF ज्ञात करने के दो मुख्य तरीके हैं:

  • अभाज्य गुणनखंडन विधि: प्रत्येक संख्या को अभाज्य गुणनखंडों के रूप में व्यक्त करें। फिर, उभयनिष्ठ अभाज्य गुणनखंडों के गुणनफल को ज्ञात करें।
  • यूक्लिड विभाजन एल्गोरिथ्म: यूक्लिड विभाजन प्रमेयिका का उपयोग करके HCF ज्ञात करें।
महत्वपूर्ण बिंदु:
  • दो संख्याओं का HCF हमेशा उन संख्याओं से छोटा या उसके बराबर होता है।

LCM ज्ञात करना

LCM ज्ञात करने के दो मुख्य तरीके हैं:

  • अभाज्य गुणनखंडन विधि: प्रत्येक संख्या को अभाज्य गुणनखंडों के रूप में व्यक्त करें। फिर, सभी अभाज्य गुणनखंडों की उच्चतम घातों के गुणनफल को ज्ञात करें।
  • सूत्र का उपयोग: दो संख्याओं का LCM = (संख्याओं का गुणनफल) / HCF
महत्वपूर्ण बिंदु:
  • दो संख्याओं का LCM हमेशा उन संख्याओं से बड़ा या उसके बराबर होता है।

HCF और LCM के बीच संबंध

दो संख्याओं a और b के लिए, HCF(a, b) × LCM(a, b) = a × b

दशमलव प्रसार

दशमलव प्रसार (Decimal Expansion) एक संख्या को दशमलव रूप में व्यक्त करने का तरीका है। परिमेय संख्याओं का दशमलव प्रसार या तो समाप्त होता है या दोहराता है, जबकि अपरिमेय संख्याओं का दशमलव प्रसार न तो समाप्त होता है और न ही दोहराता है।

दशमलव प्रसार के प्रकार

  • समाप्त दशमलव (Terminating Decimal): दशमलव प्रसार जो एक निश्चित संख्या पर समाप्त हो जाता है। उदाहरण: 0.25
  • असमाप्त आवर्ती दशमलव (Non-terminating Recurring Decimal): दशमलव प्रसार जो कभी समाप्त नहीं होता है, लेकिन अंकों का एक समूह बार-बार दोहराता है। उदाहरण: 0.333…

परिमेय और अपरिमेय संख्याओं का दशमलव प्रसार

  • परिमेय संख्याएँ: इनका दशमलव प्रसार या तो समाप्त होता है या दोहराता है।
  • अपरिमेय संख्याएँ: इनका दशमलव प्रसार न तो समाप्त होता है और न ही दोहराता है।
महत्वपूर्ण बिंदु:
  • किसी भी परिमेय संख्या को दशमलव रूप में व्यक्त किया जा सकता है।
  • अपरिमेय संख्याओं को दशमलव रूप में सटीक रूप से व्यक्त नहीं किया जा सकता है।

वास्तविक संख्याओं पर संक्रियाएँ

वास्तविक संख्याओं पर संक्रियाएँ (Operations on Real Numbers) वे क्रियाएँ हैं जो हम वास्तविक संख्याओं पर कर सकते हैं, जैसे जोड़, घटाव, गुणा और भाग। इन संक्रियाओं के कुछ महत्वपूर्ण गुण हैं जो हमें गणितीय समस्याओं को हल करने में मदद करते हैं।

जोड़, घटाव, गुणा और भाग

  • जोड़ (Addition): दो संख्याओं को एक साथ मिलाना।
  • घटाव (Subtraction): एक संख्या को दूसरी संख्या से अलग करना।
  • गुणा (Multiplication): संख्याओं को बार-बार जोड़ना।
  • भाग (Division): एक संख्या को समान भागों में विभाजित करना।

गुणधर्म

  • क्रमविनिमेय गुण (Commutative Property): a + b = b + a और a × b = b × a
  • सहचर्य गुण (Associative Property): (a + b) + c = a + (b + c) और (a × b) × c = a × (b × c)
  • वितरण गुण (Distributive Property): a × (b + c) = a × b + a × c

घातांक और करणी

घातांक (Exponents) और करणी (Surds) वास्तविक संख्याओं से संबंधित महत्वपूर्ण अवधारणाएँ हैं। घातांक एक संख्या को स्वयं से कई बार गुणा करने का प्रतिनिधित्व करते हैं, जबकि करणी एक संख्या का मूल ज्ञात करने का प्रतिनिधित्व करती है।

घातांक के नियम

घातांक के कुछ महत्वपूर्ण नियम इस प्रकार हैं:

  • am × an = am+n
  • am / an = am-n
  • (am)n = amn
  • (ab)m = am × bm
  • a0 = 1

करणी

करणी एक अपरिमेय संख्या है जो एक संख्या का मूल (root) ज्ञात करने का प्रतिनिधित्व करती है। उदाहरण के लिए, √2 एक करणी है।

परिभाषा:
यदि xn = a, तो x को a का nवाँ मूल कहा जाता है, जिसे √[n]a के रूप में दर्शाया जाता है।

करणी के नियम

करणी के कुछ महत्वपूर्ण नियम इस प्रकार हैं:

  • √ab = √a × √b
  • √(a/b) = √a / √b
  • (√a)2 = a

अध्याय का सारांश

अध्याय 1: वास्तविक संख्याओं का सारांश
  • वास्तविक संख्याएँ: परिमेय और अपरिमेय संख्याओं का संग्रह।
  • परिमेय संख्याएँ: p/q के रूप में व्यक्त की जा सकने वाली संख्याएँ।
  • अपरिमेय संख्याएँ: p/q के रूप में व्यक्त नहीं की जा सकने वाली संख्याएँ।
  • यूक्लिड विभाजन प्रमेयिका: a = bq + r (0 ≤ r < b)
  • अभाज्य गुणनखंडन प्रमेय: प्रत्येक भाज्य संख्या को अभाज्य गुणनखंडों के रूप में व्यक्त किया जा सकता है।
  • HCF: महत्तम समापवर्तक, दो संख्याओं का सबसे बड़ा उभयनिष्ठ गुणनखंड।
  • LCM: लघुत्तम समापवर्त्य, दो संख्याओं का सबसे छोटा उभयनिष्ठ गुणज।
  • दशमलव प्रसार: संख्याओं को दशमलव रूप में व्यक्त करने का तरीका।
  • घातांक और करणी: वास्तविक संख्याओं से संबंधित महत्वपूर्ण अवधारणाएँ।

निष्कर्ष

इस अध्याय में, हमने वास्तविक संख्याओं और उनसे संबंधित विभिन्न अवधारणाओं का अध्ययन किया। हमने परिमेय, अपरिमेय संख्याओं, यूक्लिड विभाजन प्रमेयिका, अभाज्य गुणनखंडन प्रमेय, HCF, LCM, दशमलव प्रसार, घातांक और करणी के बारे में सीखा। यह अध्याय गणित की नींव रखता है और आपको आगे की गणितीय अवधारणाओं को समझने में मदद करेगा। मुझे उम्मीद है कि यह अध्ययन सामग्री आपके लिए उपयोगी रही होगी।

अतिरिक्त अध्ययन के लिए प्रश्न

यहाँ कुछ प्रश्न दिए गए हैं जो आपको इस अध्याय को और बेहतर ढंग से समझने में मदद करेंगे:

लघु उत्तरीय प्रश्न

  1. वास्तविक संख्याएँ क्या हैं? उदाहरण दें।
  2. परिमेय और अपरिमेय संख्याओं में अंतर स्पष्ट करें।
  3. यूक्लिड विभाजन प्रमेयिका का कथन लिखें।
  4. अभाज्य गुणनखंडन प्रमेय क्या है?
  5. HCF और LCM को परिभाषित करें।
  6. दशमलव प्रसार के प्रकार क्या हैं? उदाहरण दें।
  7. घातांक के नियम लिखें।
  8. करणी क्या है? करणी के नियम लिखें।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

  1. यूक्लिड विभाजन प्रमेयिका का उपयोग करके 135 और 225 का HCF ज्ञात करें।
  2. अभाज्य गुणनखंडन विधि द्वारा 140 का अभाज्य गुणनखंडन ज्ञात करें।
  3. अभाज्य गुणनखंडन विधि द्वारा 96 और 404 का HCF और LCM ज्ञात करें।
  4. दिखाइए कि √5 एक अपरिमेय संख्या है।
  5. दशमलव प्रसार ज्ञात कीजिए: 13/3125

बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

नीचे दिए गए बहुविकल्पीय प्रश्नों को हल करें और अपनी समझ का परीक्षण करें:

  1. निम्नलिखित में से कौन सी संख्या अपरिमेय है?

    1. 22/7
    2. √4
    3. √2
    4. 0.25
  2. यूक्लिड विभाजन प्रमेयिका के अनुसार, a = bq + r में r का मान क्या हो सकता है?

    1. r > b
    2. r < 0
    3. 0 ≤ r < b
    4. r = b
  3. दो संख्याओं का HCF 15 और LCM 90 है। यदि एक संख्या 30 है, तो दूसरी संख्या क्या है?

    1. 45
    2. 30
    3. 60
    4. 90
  4. संख्या 234 को अभाज्य गुणनखंडों के रूप में कैसे व्यक्त किया जा सकता है?

    1. 2 × 3 × 3 × 13
    2. 2² × 3² × 13
    3. 2 × 3² × 13
    4. 2³ × 3 × 13
  5. निम्नलिखित में से कौन सा दशमलव प्रसार समाप्त होता है?

    1. 1/3
    2. 2/11
    3. 7/8
    4. 5/7

MCQs के उत्तर

  1. c
  2. c
  3. a
  4. c
  5. c
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