कक्षा 12: राजनीति विज्ञान – दो ध्रुवीयता का अंत (Quick Revision Notes)
- 1. कक्षा 12: राजनीति विज्ञान – दो ध्रुवीयता का अंत (Quick Revision Notes)
- 2. मुख्य अवधारणाएँ (Key Concepts)
- 3. महत्वपूर्ण परिभाषाएँ (Important Definitions)
- 4. मुख्य तथ्य और सूत्र (Key Facts and Formulas)
- 5. अध्याय संरचना का मन मानचित्र (Mind Map of Chapter Structure)
- 6. त्वरित संशोधन बिंदु (Quick Revision Points)
- 7. निष्कर्ष (Conclusion)
यह त्वरित पुनरीक्षण नोट्स कक्षा 12 के राजनीति विज्ञान के पहले अध्याय, दो ध्रुवीयता का अंत पर केंद्रित है। यह अध्याय शीत युद्ध के बाद की दुनिया में हुई प्रमुख घटनाओं और बदलावों की पड़ताल करता है। हम सोवियत संघ के विघटन, एकध्रुवीय विश्व व्यवस्था के उदय, और विभिन्न देशों पर इसके प्रभावों को समझेंगे। ये नोट्स परीक्षा की तैयारी के लिए डिज़ाइन किए गए हैं, जिसमें महत्वपूर्ण अवधारणाओं, परिभाषाओं, तथ्यों और त्वरित संशोधन बिंदुओं को शामिल किया गया है।
इस अध्याय में, हम शीत युद्ध के अंत के कारणों, सोवियत संघ के पतन के परिणामों, और दुनिया पर इसके प्रभावों का अध्ययन करेंगे। हम नए देशों के उदय और वैश्विक राजनीति में बदलाव को भी देखेंगे। इन नोट्स का उद्देश्य छात्रों को इस अध्याय के महत्वपूर्ण पहलुओं को समझने और परीक्षा के लिए प्रभावी ढंग से तैयार करने में मदद करना है।
मुख्य अवधारणाएँ (Key Concepts)
- सोवियत संघ का विघटन (Dissolution of the Soviet Union): सोवियत संघ का 1991 में कई गणराज्यों में टूटना। यह शीत युद्ध के अंत का एक महत्वपूर्ण पड़ाव था।
- शीत युद्ध (Cold War): संयुक्त राज्य अमेरिका और सोवियत संघ के बीच वैचारिक टकराव और तनाव की अवधि, जिसमें दोनों देश एक-दूसरे के खिलाफ अप्रत्यक्ष रूप से लड़ते रहे।
- दो ध्रुवीयता (Bipolarity): शीत युद्ध के दौरान दुनिया का दो प्रमुख शक्तियों, संयुक्त राज्य अमेरिका और सोवियत संघ में विभाजित होना।
- एकध्रुवीयता (Unipolarity): सोवियत संघ के पतन के बाद संयुक्त राज्य अमेरिका का दुनिया में एकमात्र महाशक्ति के रूप में उभरना।
- शॉक थेरेपी (Shock Therapy): सोवियत संघ के विघटन के बाद रूस, मध्य एशिया और पूर्वी यूरोप के देशों में अर्थव्यवस्था को पूंजीवादी अर्थव्यवस्था में बदलने की नीति।
- बाल्कन संघर्ष (Balkan Conflicts): यूगोस्लाविया के विघटन के बाद बाल्कन क्षेत्र में जातीय संघर्ष और युद्ध।
- अरब स्प्रिंग (Arab Spring): 2010-2012 में मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका के देशों में लोकतंत्र और मानवाधिकारों की मांग को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों की लहर।
- नई विश्व व्यवस्था (New World Order): सोवियत संघ के पतन के बाद वैश्विक राजनीति में बदलाव और संयुक्त राज्य अमेरिका के नेतृत्व में एक नई व्यवस्था की स्थापना।
- गुटनिरपेक्ष आंदोलन (Non-Aligned Movement): शीत युद्ध के दौरान उन देशों का समूह जिन्होंने किसी भी महाशक्ति के साथ गठबंधन करने से इनकार कर दिया।
- वैश्वीकरण (Globalization): दुनिया के विभिन्न देशों के बीच बढ़ती हुई अंतर्निर्भरता और एकीकरण की प्रक्रिया, जिसमें आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलू शामिल हैं।
- क्षेत्रीयतावाद (Regionalism): एक विशेष भौगोलिक क्षेत्र के देशों द्वारा अपने आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक हितों को बढ़ावा देने के लिए सहयोग करना।
- आतंकवाद (Terrorism): राजनीतिक उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए हिंसा या हिंसा की धमकी का उपयोग, जो नागरिकों में डर पैदा करता है।
- मानवाधिकार (Human Rights): वे अधिकार जो सभी मनुष्यों को बिना किसी भेदभाव के प्राप्त होते हैं, जैसे जीवन का अधिकार, स्वतंत्रता का अधिकार और समानता का अधिकार।
- पर्यावरण संरक्षण (Environmental Protection): प्राकृतिक पर्यावरण को नुकसान से बचाने और उसे सुधारने के प्रयास।
- संयुक्त राष्ट्र (United Nations): एक अंतरराष्ट्रीय संगठन जो दुनिया में शांति और सुरक्षा बनाए रखने, मानवाधिकारों की रक्षा करने और सामाजिक और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने का काम करता है।
महत्वपूर्ण परिभाषाएँ (Important Definitions)
मुख्य तथ्य और सूत्र (Key Facts and Formulas)
- सोवियत संघ का विघटन: 1991
- शीत युद्ध का अंत: 1991
- शॉक थेरेपी: पूंजीवादी अर्थव्यवस्था में परिवर्तन की नीति
- गुटनिरपेक्ष आंदोलन का उद्देश्य: शीत युद्ध की राजनीति से अलग रहना
- संयुक्त राष्ट्र की स्थापना: 1945
अध्याय संरचना का मन मानचित्र (Mind Map of Chapter Structure)
- सोवियत संघ का विघटन: कारण और परिणाम
- एकध्रुवीय विश्व: संयुक्त राज्य अमेरिका का वर्चस्व
- शॉक थेरेपी और उसके परिणाम
- बाल्कन संघर्ष और जातीय संघर्ष
- अरब स्प्रिंग और लोकतंत्र की लहर
- वैश्वीकरण और नई विश्व व्यवस्था
त्वरित संशोधन बिंदु (Quick Revision Points)
- सोवियत संघ का विघटन: आर्थिक और राजनीतिक कारणों से हुआ।
- शीत युद्ध का अंत: दुनिया में एक नए युग की शुरुआत हुई।
- एकध्रुवीयता: संयुक्त राज्य अमेरिका का दुनिया पर प्रभाव बढ़ा।
- शॉक थेरेपी: पूर्वी यूरोप में आर्थिक बदलाव लाए।
- बाल्कन संघर्ष: जातीय तनाव और हिंसा का परिणाम था।
- अरब स्प्रिंग: लोकतंत्र और मानवाधिकारों के लिए संघर्ष था।
- वैश्वीकरण: दुनिया को जोड़ता है और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ाता है।
- आतंकवाद: वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरा है।
- मानवाधिकार: सभी के लिए महत्वपूर्ण हैं और इनकी रक्षा की जानी चाहिए।
- सोवियत संघ के विघटन के कारणों और परिणामों का अध्ययन करें।
- एकध्रुवीयता और उसके प्रभावों को समझें।
- शॉक थेरेपी के परिणामों पर ध्यान दें।
- बाल्कन संघर्ष और अरब स्प्रिंग की घटनाओं को याद रखें।
- वैश्वीकरण के सकारात्मक और नकारात्मक पहलुओं को समझें।
निष्कर्ष (Conclusion)
इस अध्याय में, हमने दो ध्रुवीयता के अंत के बारे में सीखा। हमने सोवियत संघ के विघटन, एकध्रुवीय विश्व व्यवस्था के उदय, और वैश्विक राजनीति पर इसके प्रभावों का अध्ययन किया। हमने शॉक थेरेपी, बाल्कन संघर्ष, अरब स्प्रिंग, और वैश्वीकरण जैसी महत्वपूर्ण घटनाओं और अवधारणाओं को भी समझा। यह अध्याय हमें शीत युद्ध के बाद की दुनिया को समझने में मदद करता है और भविष्य की चुनौतियों और अवसरों के लिए तैयार करता है।
परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करने के लिए, इन नोट्स का अच्छी तरह से अध्ययन करें, महत्वपूर्ण अवधारणाओं को समझें, और नियमित रूप से अभ्यास करें। यदि आप इस अध्याय को अच्छी तरह से समझ गए हैं, तो आप आगामी परीक्षाओं में बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।