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Class 9 Science Chapter 10 Notes in Hindi – Detailed Notes

Posted on January 29, 2026 by Anshul Gupta

कक्षा 9 विज्ञान अध्याय 10: गुरुत्वाकर्षण (Class 9 Science Chapter 10: Gravitation)

Table of Content
  • 1. कक्षा 9 विज्ञान अध्याय 10: गुरुत्वाकर्षण (Class 9 Science Chapter 10: Gravitation)
  • 2. गुरुत्वाकर्षण का परिचय (Introduction to Gravitation)
  • 3. न्यूटन का गुरुत्वाकर्षण का सार्वत्रिक नियम (Newton’s Law of Universal Gravitation)
  • 4. गुरुत्वाकर्षण बल के कारण त्वरण (Acceleration due to Gravity – g)
  • 5. द्रव्यमान और भार (Mass and Weight)
  • 6. उत्प्लावकता (Buoyancy)
  • 7. आर्किमिडीज का सिद्धांत (Archimedes’ Principle)
  • 8. आपेक्षिक घनत्व (Relative Density)
  • 9. गुरुत्वाकर्षण के अनुप्रयोग (Applications of Gravitation)
  • 10. गुरुत्वाकर्षण का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य (Historical Perspective of Gravitation)
  • 11. निष्कर्ष (Conclusion)

नमस्ते! कक्षा 9 विज्ञान के अध्याय 10, गुरुत्वाकर्षण में आपका स्वागत है। इस अध्याय में, हम गुरुत्वाकर्षण की मूलभूत बातें सीखेंगे, जो एक ऐसी शक्ति है जो हमें पृथ्वी पर रखती है और ग्रहों को सूर्य के चारों ओर घुमाती है। हम गुरुत्वाकर्षण के बारे में जानेंगे, गुरुत्वाकर्षण की अवधारणा को समझेंगे, और गुरुत्वाकर्षण से संबंधित विभिन्न पहलुओं का अध्ययन करेंगे। यह अध्याय विज्ञान के एक महत्वपूर्ण पहलू को समझने में आपकी मदद करेगा जो हमारे दैनिक जीवन को प्रभावित करता है।

इस अध्याय में, आप निम्नलिखित बातों के बारे में जानेंगे:

  • गुरुत्वाकर्षण क्या है और यह कैसे काम करता है।
  • न्यूटन का गुरुत्वाकर्षण का सार्वत्रिक नियम।
  • गुरुत्वाकर्षण के कारण त्वरण (g)।
  • द्रव्यमान और भार के बीच का अंतर।
  • उत्प्लावकता और आर्किमिडीज का सिद्धांत।
  • किसी वस्तु का आपेक्षिक घनत्व।

गुरुत्वाकर्षण का परिचय (Introduction to Gravitation)

गुरुत्वाकर्षण एक ऐसी शक्ति है जो किन्हीं भी दो वस्तुओं को एक दूसरे की ओर आकर्षित करती है। यह शक्ति वस्तुओं के द्रव्यमान पर निर्भर करती है और उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होती है। सरल शब्दों में, जितना अधिक द्रव्यमान होगा, गुरुत्वाकर्षण बल उतना ही मजबूत होगा, और जितनी अधिक दूरी होगी, गुरुत्वाकर्षण बल उतना ही कमजोर होगा।

गुरुत्वाकर्षण हमारे दैनिक जीवन में हर जगह मौजूद है: यह हमें पृथ्वी पर टिकाए रखता है, ग्रहों को सूर्य के चारों ओर घुमाता है, और ज्वार-भाटे का कारण बनता है। गुरुत्वाकर्षण के बिना, हम अंतरिक्ष में तैरते रहते, और ब्रह्मांड का कोई भी ढांचा नहीं होता।

गुरुत्वाकर्षण (Gravitation)
यह एक ऐसा बल है जो दो वस्तुओं को एक-दूसरे की ओर आकर्षित करता है। यह बल वस्तुओं के द्रव्यमान पर निर्भर करता है और उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।

न्यूटन का गुरुत्वाकर्षण का सार्वत्रिक नियम (Newton’s Law of Universal Gravitation)

आइजैक न्यूटन ने गुरुत्वाकर्षण के बारे में एक महत्वपूर्ण नियम दिया, जिसे न्यूटन का गुरुत्वाकर्षण का सार्वत्रिक नियम कहा जाता है। यह नियम बताता है कि किन्हीं भी दो वस्तुओं के बीच लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल निम्नलिखित बातों पर निर्भर करता है:

  • वस्तुओं के द्रव्यमान (mass) का गुणनफल
  • वस्तुओं के बीच की दूरी का वर्ग

यह नियम कहता है कि गुरुत्वाकर्षण बल दोनों वस्तुओं के द्रव्यमान के सीधे आनुपातिक होता है। इसका मतलब है कि यदि वस्तुओं का द्रव्यमान बढ़ता है, तो गुरुत्वाकर्षण बल भी बढ़ेगा। इसके अतिरिक्त, गुरुत्वाकर्षण बल वस्तुओं के बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है। इसका मतलब है कि यदि दूरी बढ़ती है, तो गुरुत्वाकर्षण बल घटता है, और यदि दूरी घटती है, तो गुरुत्वाकर्षण बल बढ़ता है।

न्यूटन का गुरुत्वाकर्षण का सार्वत्रिक नियम: F = G (m1 m2) / r^2
जहाँ:
F = गुरुत्वाकर्षण बल
G = गुरुत्वाकर्षण नियतांक (6.674 x 10^-11 Nm²/kg²)
m1 और m2 = दो वस्तुओं के द्रव्यमान
r = दोनों वस्तुओं के बीच की दूरी

उदाहरण के लिए, यदि एक सेब पेड़ से गिरता है, तो पृथ्वी और सेब के बीच गुरुत्वाकर्षण बल के कारण ऐसा होता है। पृथ्वी का द्रव्यमान बहुत बड़ा है, इसलिए यह सेब को अपनी ओर खींचती है। सेब भी पृथ्वी को खींचता है, लेकिन पृथ्वी का द्रव्यमान बहुत बड़ा होने के कारण, हमें इसका प्रभाव महसूस नहीं होता है।

गुरुत्वाकर्षण बल के कारण त्वरण (Acceleration due to Gravity – g)

जब कोई वस्तु पृथ्वी की ओर गिरती है, तो वह गुरुत्वाकर्षण बल के कारण त्वरित होती है। इस त्वरण को गुरुत्वाकर्षण के कारण त्वरण कहा जाता है, और इसे ‘g’ से दर्शाया जाता है। पृथ्वी की सतह पर, ‘g’ का मान लगभग 9.8 मीटर प्रति सेकंड वर्ग (9.8 m/s²) होता है।

इसका मतलब है कि जब कोई वस्तु गिरती है, तो उसकी गति हर सेकंड 9.8 मीटर प्रति सेकंड बढ़ जाती है। उदाहरण के लिए, यदि आप एक पत्थर को गिराते हैं, तो एक सेकंड के बाद, उसकी गति 9.8 m/s होगी, दो सेकंड के बाद, उसकी गति 19.6 m/s होगी, और इसी तरह।

गुरुत्वाकर्षण के कारण त्वरण (g)
यह वह त्वरण है जो गुरुत्वाकर्षण बल के कारण किसी वस्तु में उत्पन्न होता है। पृथ्वी की सतह पर, इसका मान लगभग 9.8 m/s² होता है।

गुरुत्वाकर्षण के कारण त्वरण का मान वस्तु के द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करता है। इसका मतलब है कि एक भारी वस्तु और एक हल्की वस्तु, दोनों ही समान त्वरण के साथ गिरेंगी, यदि हवा का प्रतिरोध न हो।

द्रव्यमान और भार (Mass and Weight)

द्रव्यमान (Mass) किसी वस्तु में मौजूद पदार्थ की मात्रा है। यह एक अदिश राशि है, और इसका मात्रक किलोग्राम (kg) है। द्रव्यमान हर जगह समान रहता है, चाहे आप पृथ्वी पर हों, चंद्रमा पर हों, या अंतरिक्ष में।

भार (Weight) वह बल है जिससे पृथ्वी किसी वस्तु को अपनी ओर खींचती है। यह एक सदिश राशि है, और इसका मात्रक न्यूटन (N) है। भार वस्तु के द्रव्यमान और गुरुत्वाकर्षण के कारण त्वरण (g) पर निर्भर करता है।

भार (Weight) का सूत्र: W = m * g
जहाँ:
W = भार
m = द्रव्यमान
g = गुरुत्वाकर्षण के कारण त्वरण

उदाहरण के लिए, यदि किसी वस्तु का द्रव्यमान 10 kg है, तो पृथ्वी पर उसका भार W = 10 kg * 9.8 m/s² = 98 N होगा। चंद्रमा पर, गुरुत्वाकर्षण के कारण त्वरण (g) का मान पृथ्वी की तुलना में कम होता है, इसलिए उसी वस्तु का भार भी कम होगा।

द्रव्यमान (Mass)
  • पदार्थ की मात्रा
  • अदिश राशि
  • मात्रक: किलोग्राम (kg)
  • हर जगह समान रहता है
भार (Weight)
  • गुरुत्वाकर्षण बल
  • सदिश राशि
  • मात्रक: न्यूटन (N)
  • स्थान के अनुसार बदलता है

उत्प्लावकता (Buoyancy)

जब कोई वस्तु किसी तरल में डुबोई जाती है, तो तरल उस वस्तु पर ऊपर की ओर एक बल लगाता है। इस बल को उत्प्लावक बल (Buoyant force) कहा जाता है, और इस घटना को उत्प्लावकता (Buoyancy) कहा जाता है।

उत्प्लावक बल वस्तु के आकार और तरल के घनत्व पर निर्भर करता है। यदि उत्प्लावक बल वस्तु के भार से अधिक होता है, तो वस्तु तैरती है। यदि उत्प्लावक बल वस्तु के भार से कम होता है, तो वस्तु डूब जाती है।

उदाहरण के लिए, एक जहाज पानी में तैरता है क्योंकि जहाज का आकार पानी को विस्थापित करता है, और विस्थापित पानी का भार जहाज के भार के बराबर या उससे अधिक होता है।

उत्प्लावकता (Buoyancy)
यह वह घटना है जिसमें कोई वस्तु किसी तरल में डुबोए जाने पर ऊपर की ओर एक बल का अनुभव करती है।

आर्किमिडीज का सिद्धांत (Archimedes’ Principle)

आर्किमिडीज ने उत्प्लावकता के बारे में एक महत्वपूर्ण सिद्धांत दिया, जिसे आर्किमिडीज का सिद्धांत कहा जाता है। यह सिद्धांत बताता है कि जब कोई वस्तु किसी तरल में आंशिक या पूर्ण रूप से डुबोई जाती है, तो उस पर लगने वाला उत्प्लावक बल वस्तु द्वारा विस्थापित तरल के भार के बराबर होता है।

आर्किमिडीज का सिद्धांत निम्नलिखित बातों को समझने में मदद करता है:

  • कोई वस्तु क्यों तैरती है या डूबती है।
  • जहाज कैसे तैरते हैं।
  • पानी के अंदर वस्तुओं का भार कम क्यों होता है।

आर्किमिडीज का सिद्धांत: उत्प्लावक बल = विस्थापित तरल का भार

उदाहरण के लिए, यदि आप एक पत्थर को पानी में डालते हैं, तो पत्थर द्वारा विस्थापित पानी का भार पत्थर पर लगने वाले उत्प्लावक बल के बराबर होगा। यदि पत्थर का भार उत्प्लावक बल से अधिक है, तो पत्थर डूब जाएगा।

आपेक्षिक घनत्व (Relative Density)

आपेक्षिक घनत्व (Relative density) किसी वस्तु के घनत्व और पानी के घनत्व का अनुपात है। यह बताता है कि कोई वस्तु पानी से कितनी भारी या हल्की है। आपेक्षिक घनत्व एक विमाहीन राशि है, और इसका कोई मात्रक नहीं होता है।

आपेक्षिक घनत्व का सूत्र: आपेक्षिक घनत्व = वस्तु का घनत्व / पानी का घनत्व

यदि किसी वस्तु का आपेक्षिक घनत्व 1 से अधिक है, तो वह वस्तु पानी में डूब जाएगी। यदि किसी वस्तु का आपेक्षिक घनत्व 1 से कम है, तो वह वस्तु पानी में तैरेगी।

उदाहरण के लिए, लकड़ी का आपेक्षिक घनत्व लगभग 0.6 होता है, इसलिए लकड़ी पानी में तैरती है। लोहे का आपेक्षिक घनत्व लगभग 7.8 होता है, इसलिए लोहा पानी में डूब जाता है।

आपेक्षिक घनत्व के उदाहरण
सामग्रीआपेक्षिक घनत्वपरिणाम
लकड़ी0.6तैरती है
बर्फ0.92तैरती है
पानी1.0–
लोहा7.8डूब जाता है
सोना19.3डूब जाता है

गुरुत्वाकर्षण के अनुप्रयोग (Applications of Gravitation)

गुरुत्वाकर्षण हमारे दैनिक जीवन में कई तरीकों से उपयोग किया जाता है। यहाँ कुछ उदाहरण दिए गए हैं:

  • पृथ्वी पर रहना: गुरुत्वाकर्षण हमें पृथ्वी पर टिकाए रखता है।
  • ग्रहों की गति: गुरुत्वाकर्षण ग्रहों को सूर्य के चारों ओर घुमाता है।
  • ज्वार-भाटा: चंद्रमा और सूर्य के गुरुत्वाकर्षण बल के कारण ज्वार-भाटा आते हैं।
  • उपग्रहों का प्रक्षेपण: उपग्रहों को पृथ्वी की कक्षा में स्थापित करने के लिए गुरुत्वाकर्षण का उपयोग किया जाता है।
  • वजन मापना: भार मापने के लिए गुरुत्वाकर्षण का उपयोग किया जाता है।

गुरुत्वाकर्षण के बिना, जीवन संभव नहीं होगा। यह ब्रह्मांड को एक साथ रखने वाली एक मूलभूत शक्ति है।

गुरुत्वाकर्षण का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य (Historical Perspective of Gravitation)

गुरुत्वाकर्षण की खोज और समझ एक लंबी और दिलचस्प प्रक्रिया रही है। यहां कुछ प्रमुख मील के पत्थर दिए गए हैं:

इन वैज्ञानिकों और उनके कार्यों ने गुरुत्वाकर्षण की हमारी समझ को आकार दिया है, जिससे यह विज्ञान की सबसे महत्वपूर्ण अवधारणाओं में से एक बन गई है।

निष्कर्ष (Conclusion)

इस अध्याय में, हमने गुरुत्वाकर्षण की मूल बातें सीखीं। हमने गुरुत्वाकर्षण की परिभाषा, न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण का सार्वत्रिक नियम, गुरुत्वाकर्षण के कारण त्वरण, द्रव्यमान और भार के बीच का अंतर, उत्प्लावकता, आर्किमिडीज का सिद्धांत और आपेक्षिक घनत्व के बारे में जाना।

यहाँ कुछ मुख्य बातें हैं जिन्हें आपको याद रखना चाहिए:

  • गुरुत्वाकर्षण एक ऐसी शक्ति है जो वस्तुओं को एक-दूसरे की ओर आकर्षित करती है।
  • न्यूटन का गुरुत्वाकर्षण का सार्वत्रिक नियम गुरुत्वाकर्षण बल की गणना करने में मदद करता है।
  • गुरुत्वाकर्षण के कारण त्वरण (g) पृथ्वी की सतह पर लगभग 9.8 m/s² होता है।
  • द्रव्यमान पदार्थ की मात्रा है, जबकि भार गुरुत्वाकर्षण बल है।
  • उत्प्लावकता एक ऐसी घटना है जिसमें कोई वस्तु किसी तरल में ऊपर की ओर एक बल का अनुभव करती है।
  • आर्किमिडीज का सिद्धांत उत्प्लावक बल की व्याख्या करता है।
  • आपेक्षिक घनत्व बताता है कि कोई वस्तु पानी से कितनी भारी या हल्की है।

मुझे उम्मीद है कि इस अध्याय ने आपको गुरुत्वाकर्षण को समझने में मदद की होगी। अब आप इस ज्ञान का उपयोग विज्ञान के अन्य अवधारणाओं का अध्ययन करने और अपने आसपास की दुनिया को बेहतर ढंग से समझने के लिए कर सकते हैं। आगे बढ़ते रहें और सीखते रहें!

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