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कक्षा 11 भूगोल अध्याय 1 – भूगोल एक विषय के रूप में

Posted on January 28, 2026January 28, 2026 by Anshul Gupta

कक्षा 11 भूगोल: अध्याय 1 – भूगोल एक विषय के रूप में

Table of Content
  • 1. कक्षा 11 भूगोल: अध्याय 1 – भूगोल एक विषय के रूप में
  • 2. भूगोल की परिभाषा और प्रकृति
    • 2.1. भूगोल के अध्ययन के दृष्टिकोण
  • 3. भूगोल की शाखाएँ
    • 3.1. भौतिक भूगोल
    • 3.2. मानव भूगोल
  • 4. मानव और पर्यावरण के बीच संबंध
  • 5. भूगोल का महत्व
  • 6. भूगोल के अध्ययन के तरीके
  • 7. भूगोल और अन्य विषय
  • 8. मानचित्रण: भूगोल का एक आवश्यक उपकरण
  • 9. भूगोल में स्थानिक विश्लेषण
  • 10. निष्कर्ष

यह अध्याय कक्षा 11 की भूगोल की पाठ्यपुस्तक का पहला अध्याय है, जो भूगोल विषय की प्रकृति, क्षेत्र और महत्व का परिचय देता है। यह भूगोल के अध्ययन के दृष्टिकोण, इसकी शाखाओं और मानव और पर्यावरण के बीच के जटिल संबंधों की पड़ताल करता है। इस अध्याय का उद्देश्य छात्रों को भूगोल की बुनियादी बातों से परिचित कराना है और उन्हें इस विषय के व्यापक दायरे और महत्व की जानकारी देना है।

इस अध्याय में, आप निम्नलिखित विषयों के बारे में जानेंगे:

  • भूगोल की परिभाषा और प्रकृति: भूगोल क्या है और यह अन्य विषयों से कैसे भिन्न है।
  • भूगोल का अध्ययन: भूगोल के अध्ययन के विभिन्न दृष्टिकोण और पद्धतियाँ।
  • भूगोल की शाखाएँ: भूगोल की प्रमुख शाखाएँ, जैसे कि भौतिक भूगोल और मानव भूगोल।
  • मानव और पर्यावरण के बीच संबंध: मानव गतिविधियों और पर्यावरण के बीच की पारस्परिक क्रिया।
  • भूगोल का महत्व: भूगोल का महत्व और आधुनिक दुनिया में इसकी प्रासंगिकता।

भूगोल की परिभाषा और प्रकृति

भूगोल एक ऐसा विषय है जो पृथ्वी की सतह पर पाए जाने वाले प्राकृतिक और मानवीय तत्वों का अध्ययन करता है। यह अंतरिक्षीय भिन्नता का अध्ययन करता है, यानी पृथ्वी की सतह पर तत्वों की स्थानिक व्यवस्था और वितरण। भूगोल न केवल इन तत्वों का वर्णन करता है, बल्कि उनके बीच के संबंधों और प्रक्रियाओं को भी समझने का प्रयास करता है।

परिभाषा: भूगोल पृथ्वी की सतह पर पाए जाने वाले प्राकृतिक और मानवीय तत्वों का अध्ययन है, जो उनकी स्थानिक व्यवस्था, वितरण और उनके बीच के संबंधों पर केंद्रित है।

भूगोल की प्रकृति गतिशील और बहुआयामी है। यह एक अंतःविषय विषय है, जो कई अन्य विषयों, जैसे कि भूगर्भशास्त्र, जलवायु विज्ञान, मृदा विज्ञान, जीव विज्ञान, अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र और इतिहास से जानकारी लेता है। भूगोल का अध्ययन हमें पृथ्वी को एक एकीकृत प्रणाली के रूप में देखने में मदद करता है, जहाँ सभी तत्व एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।

भूगोल के अध्ययन के दृष्टिकोण

भूगोल का अध्ययन विभिन्न दृष्टिकोणों से किया जा सकता है। ये दृष्टिकोण हमें पृथ्वी और उसकी घटनाओं को समझने के अलग-अलग तरीके प्रदान करते हैं।

  • व्यवस्थित दृष्टिकोण: यह दृष्टिकोण किसी विशेष भौगोलिक घटना का अध्ययन एक व्यवस्थित तरीके से करता है। उदाहरण के लिए, जलवायु का अध्ययन, जिसमें तापमान, वर्षा और हवाओं जैसे तत्वों का विश्लेषण शामिल है।
  • क्षेत्रीय दृष्टिकोण: यह दृष्टिकोण पृथ्वी को क्षेत्रों में विभाजित करता है और प्रत्येक क्षेत्र की विशिष्ट विशेषताओं का अध्ययन करता है। उदाहरण के लिए, भारत के विभिन्न राज्यों और उनके सांस्कृतिक, आर्थिक और पर्यावरणीय विशेषताओं का अध्ययन।
  • द्वैतवाद: भूगोल में द्वैतवाद एक महत्वपूर्ण अवधारणा है। यह दो मुख्य दृष्टिकोणों को संदर्भित करता है:
    • भौतिक भूगोल बनाम मानव भूगोल: भौतिक भूगोल प्राकृतिक वातावरण का अध्ययन करता है, जबकि मानव भूगोल मानव गतिविधियों और उनके पर्यावरण के साथ संबंधों का अध्ययन करता है।
    • वर्णनात्मक बनाम व्यवस्थित भूगोल: वर्णनात्मक भूगोल पृथ्वी की सतह का वर्णन करता है, जबकि व्यवस्थित भूगोल पृथ्वी पर प्रक्रियाओं और घटनाओं के बीच संबंधों का विश्लेषण करता है।
अंतरिक्षीय भिन्नता
पृथ्वी की सतह पर तत्वों की स्थानिक व्यवस्था और वितरण, जैसे कि जलवायु, वनस्पति, जनसंख्या, और आर्थिक गतिविधियों में अंतर।

भूगोल की शाखाएँ

भूगोल एक विशाल विषय है, जिसे अध्ययन की सुविधा के लिए कई शाखाओं में विभाजित किया गया है। इन शाखाओं में से प्रत्येक पृथ्वी की सतह के एक विशिष्ट पहलू पर केंद्रित है।

भौतिक भूगोल

भौतिक भूगोल पृथ्वी के प्राकृतिक वातावरण का अध्ययन करता है। इसमें निम्नलिखित उप-शाखाएँ शामिल हैं:

  • भू-आकृति विज्ञान: पृथ्वी की सतह के आकार और रूपों का अध्ययन, जैसे कि पहाड़, मैदान और नदियाँ।
  • जलवायु विज्ञान: जलवायु और मौसम का अध्ययन, जिसमें तापमान, वर्षा, हवाएँ और जलवायु परिवर्तन शामिल हैं।
  • जल विज्ञान: पानी का अध्ययन, जिसमें नदियों, झीलों, महासागरों और भूमिगत पानी शामिल हैं।
  • मृदा विज्ञान: मिट्टी का अध्ययन, जिसमें इसकी संरचना, गुण और उपयोग शामिल हैं।
  • जैव भूगोल: पौधों और जानवरों का अध्ययन, उनके वितरण और पर्यावरण के साथ उनके संबंधों सहित।

मानव भूगोल

मानव भूगोल मानव गतिविधियों और उनके पर्यावरण के साथ संबंधों का अध्ययन करता है। इसमें निम्नलिखित उप-शाखाएँ शामिल हैं:

  • जनसंख्या भूगोल: जनसंख्या के वितरण, घनत्व, वृद्धि और प्रवास का अध्ययन।
  • आर्थिक भूगोल: आर्थिक गतिविधियों, जैसे कि कृषि, उद्योग, व्यापार और पर्यटन का अध्ययन।
  • सामाजिक भूगोल: सामाजिक प्रक्रियाओं, सामाजिक समूहों और सांस्कृतिक परिदृश्यों का अध्ययन।
  • राजनीतिक भूगोल: राजनीतिक सीमाओं, राज्यों और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों का अध्ययन।
  • बस्ती भूगोल: मानव बस्तियों, जैसे कि शहरों और गांवों का अध्ययन।
भूगोल की शाखाएँ: मुख्य बातें
  • भौतिक भूगोल: प्राकृतिक वातावरण का अध्ययन (भू-आकृति विज्ञान, जलवायु विज्ञान, जल विज्ञान, मृदा विज्ञान, जैव भूगोल)।
  • मानव भूगोल: मानव गतिविधियों और पर्यावरण के साथ उनके संबंधों का अध्ययन (जनसंख्या भूगोल, आर्थिक भूगोल, सामाजिक भूगोल, राजनीतिक भूगोल, बस्ती भूगोल)।
  • प्रत्येक शाखा भूगोल के अध्ययन के लिए एक विशिष्ट दृष्टिकोण प्रदान करती है।
  • ये शाखाएँ एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं और एक-दूसरे को समझने में मदद करती हैं।

मानव और पर्यावरण के बीच संबंध

मानव और पर्यावरण के बीच का संबंध भूगोल का एक केंद्रीय विषय है। मानव गतिविधियाँ पर्यावरण को प्रभावित करती हैं, और पर्यावरण मानव जीवन को प्रभावित करता है।

मानव पर्यावरण को कई तरीकों से प्रभावित करते हैं:

  • वनों की कटाई: वनों को साफ करना कृषि, शहरीकरण और संसाधनों के निष्कर्षण के लिए।
  • प्रदूषण: हवा, पानी और मिट्टी में प्रदूषकों का प्रवेश।
  • जलवायु परिवर्तन: ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन, जिससे वैश्विक तापमान में वृद्धि होती है।
  • भूमि उपयोग परिवर्तन: प्राकृतिक आवासों का रूपांतरण कृषि भूमि, शहरी क्षेत्रों और बुनियादी ढांचे में।

पर्यावरण भी मानव जीवन को प्रभावित करता है:

  • प्राकृतिक आपदाएँ: भूकंप, बाढ़, सूखा और ज्वालामुखी विस्फोट।
  • जलवायु: फसल उत्पादन, जल संसाधनों और मानव स्वास्थ्य को प्रभावित करना।
  • संसाधन: भोजन, पानी, ऊर्जा और खनिज जैसे संसाधनों की उपलब्धता।

मानव और पर्यावरण के बीच एक सतत प्रतिक्रिया है। मानव पर्यावरण को प्रभावित करते हैं, और पर्यावरण मानव जीवन को प्रभावित करता है। इस संबंध को समझना सतत विकास के लिए आवश्यक है, जिसका अर्थ है कि वर्तमान पीढ़ियों की जरूरतों को पूरा करना भविष्य की पीढ़ियों की जरूरतों से समझौता किए बिना।

मानव और पर्यावरण के बीच संबंध
1मानव गतिविधियाँ (वनों की कटाई, प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन)

→

2पर्यावरण पर प्रभाव (पर्यावरण क्षरण, संसाधन कमी, जलवायु परिवर्तन)

→

3पर्यावरण का मानव जीवन पर प्रभाव (प्राकृतिक आपदाएँ, जलवायु परिवर्तन का प्रभाव, संसाधनों की कमी)

→

4सतत विकास के लिए प्रबंधन

भूगोल का महत्व

भूगोल आधुनिक दुनिया में एक महत्वपूर्ण विषय है, जो कई कारणों से प्रासंगिक है:

  • अंतरिक्षीय जागरूकता: भूगोल हमें पृथ्वी की सतह और उस पर होने वाली घटनाओं के बारे में जानने में मदद करता है।
  • समस्या-समाधान कौशल: भूगोल हमें जटिल स्थानिक समस्याओं का विश्लेषण करने और समाधान खोजने में मदद करता है।
  • पर्यावरण प्रबंधन: भूगोल हमें पर्यावरण के प्रबंधन और संरक्षण के लिए आवश्यक ज्ञान प्रदान करता है।
  • सतत विकास: भूगोल हमें सतत विकास के लिए नीतियों और रणनीतियों को विकसित करने में मदद करता है।
  • वैश्विक नागरिकता: भूगोल हमें अन्य संस्कृतियों और समाजों को समझने में मदद करता है, जिससे वैश्विक नागरिकता को बढ़ावा मिलता है।

भूगोल का अध्ययन हमें विभिन्न करियर क्षेत्रों में भी मदद करता है, जैसे कि शहरी नियोजन, पर्यावरण प्रबंधन, आपदा प्रबंधन, पर्यटन और शिक्षा।

भूगोल का महत्व
  • अंतरिक्षीय जागरूकता
  • समस्या-समाधान कौशल
  • पर्यावरण प्रबंधन
  • सतत विकास
भूगोल के लाभ
  • विभिन्न करियर विकल्प
  • वैश्विक नागरिकता को बढ़ावा
  • विभिन्न संस्कृतियों को समझना

भूगोल के अध्ययन के तरीके

भूगोल के अध्ययन में विभिन्न तरीकों का उपयोग किया जाता है। ये तरीके हमें पृथ्वी और उस पर होने वाली घटनाओं के बारे में जानकारी एकत्र करने, विश्लेषण करने और व्याख्या करने में मदद करते हैं।

  • क्षेत्रीय कार्य: प्रत्यक्ष अवलोकन, डेटा संग्रह और स्थानीय लोगों के साथ बातचीत के माध्यम से वास्तविक दुनिया में अध्ययन करना।
  • सर्वेक्षण: जानकारी इकट्ठा करने के लिए प्रश्नावली, साक्षात्कार और अन्य उपकरणों का उपयोग करना।
  • मानचित्रण: मानचित्रों का उपयोग करके स्थानिक जानकारी का प्रतिनिधित्व करना और विश्लेषण करना।
  • सांख्यिकीय विश्लेषण: डेटा का विश्लेषण करने और निष्कर्ष निकालने के लिए सांख्यिकीय तकनीकों का उपयोग करना।
  • दूर संवेदीकरण: उपग्रहों और हवाई जहाजों से प्राप्त छवियों का उपयोग करके पृथ्वी की सतह का अध्ययन करना।
  • भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस): कंप्यूटर आधारित प्रणाली जो स्थानिक डेटा को संग्रहीत, विश्लेषण और प्रदर्शित करती है।
भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस)
एक कंप्यूटर आधारित प्रणाली जो स्थानिक डेटा को संग्रहीत, विश्लेषण और प्रदर्शित करती है, जिसका उपयोग मानचित्र बनाने, स्थानिक विश्लेषण करने और निर्णय लेने में मदद करने के लिए किया जाता है।

भूगोल और अन्य विषय

भूगोल एक अंतःविषय विषय है, जो कई अन्य विषयों से जुड़ा हुआ है। यह अन्य विषयों से जानकारी लेता है और उन्हें समझने में मदद करता है।

  • भूगोल और भूगर्भशास्त्र: भूगर्भशास्त्र पृथ्वी की संरचना, चट्टानों और खनिजों का अध्ययन करता है, जबकि भूगोल पृथ्वी की सतह पर इन तत्वों के वितरण का अध्ययन करता है।
  • भूगोल और जलवायु विज्ञान: जलवायु विज्ञान जलवायु और मौसम का अध्ययन करता है, जबकि भूगोल जलवायु के स्थानिक वितरण और मानव जीवन पर इसके प्रभावों का अध्ययन करता है।
  • भूगोल और अर्थशास्त्र: अर्थशास्त्र आर्थिक गतिविधियों का अध्ययन करता है, जबकि भूगोल आर्थिक गतिविधियों के स्थानिक वितरण और स्थानिक असमानताओं का अध्ययन करता है।
  • भूगोल और समाजशास्त्र: समाजशास्त्र समाजों और सामाजिक समूहों का अध्ययन करता है, जबकि भूगोल सामाजिक प्रक्रियाओं, सांस्कृतिक परिदृश्यों और जनसंख्या वितरण का अध्ययन करता है।
  • भूगोल और इतिहास: इतिहास अतीत की घटनाओं का अध्ययन करता है, जबकि भूगोल इन घटनाओं के स्थानिक संदर्भ का अध्ययन करता है।
भूगोल और अन्य विषयों के बीच संबंध
भूगर्भशास्त्र
↔से संबंधित
भूगोल
↔से संबंधित
जलवायु विज्ञान, अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र, इतिहास

मानचित्रण: भूगोल का एक आवश्यक उपकरण

मानचित्रण भूगोल का एक महत्वपूर्ण उपकरण है, जिसका उपयोग पृथ्वी की सतह को दर्शाने के लिए किया जाता है। मानचित्र विभिन्न प्रकार के होते हैं, और वे विभिन्न उद्देश्यों के लिए उपयोग किए जाते हैं।

  • मानचित्रों के प्रकार:
    • भौतिक मानचित्र: भौतिक विशेषताओं, जैसे पहाड़, नदियाँ और झीलें दर्शाते हैं।
    • राजनीतिक मानचित्र: राजनीतिक सीमाओं, जैसे कि देश और राज्य दर्शाते हैं।
    • विषयगत मानचित्र: किसी विशिष्ट विषय या घटना, जैसे कि जनसंख्या घनत्व या वर्षा के पैटर्न दर्शाते हैं।
  • मानचित्र घटक:
    • शीर्षक: मानचित्र के विषय को दर्शाता है।
    • पैमाना: मानचित्र पर दूरी और वास्तविक दुनिया में दूरी के बीच का संबंध दर्शाता है।
    • दिशा: आमतौर पर उत्तर दिशा को दर्शाता है।
    • किंवदंती: मानचित्र पर उपयोग किए गए प्रतीकों और रंगों का अर्थ बताता है।
  • मानचित्रों का उपयोग: नेविगेशन, डेटा विश्लेषण और संचार सहित विभिन्न उद्देश्यों के लिए मानचित्रों का उपयोग किया जाता है।
पैमाना
मानचित्र पर दूरी और वास्तविक दुनिया में दूरी के बीच का अनुपात। यह मानचित्र पर दूरियों को मापने और वास्तविक दुनिया में दूरियों का अनुमान लगाने में मदद करता है।

भूगोल में स्थानिक विश्लेषण

स्थानिक विश्लेषण भूगोल का एक महत्वपूर्ण पहलू है, जिसमें पृथ्वी की सतह पर स्थानिक डेटा का विश्लेषण करना शामिल है। यह हमें स्थानिक पैटर्न, संबंधों और प्रक्रियाओं को समझने में मदद करता है।

  • स्थानिक विश्लेषण के तरीके:
    • बफरिंग: किसी बिंदु, रेखा या बहुभुज के आसपास एक निश्चित दूरी का क्षेत्र बनाना।
    • ओवरले विश्लेषण: दो या दो से अधिक डेटा परतों को एक साथ रखकर उनके बीच संबंधों का विश्लेषण करना।
    • निकटता विश्लेषण: किसी विशेषता से दूसरी विशेषता की दूरी का विश्लेषण करना।
    • पैटर्न विश्लेषण: स्थानिक पैटर्न, जैसे कि क्लस्टरिंग या फैलाव की पहचान करना।
  • स्थानिक विश्लेषण के अनुप्रयोग:
    • भूमि उपयोग योजना
    • परिवहन योजना
    • पर्यावरण प्रबंधन
    • आपदा प्रबंधन
स्थानिक विश्लेषण: मुख्य बातें
  • स्थानिक विश्लेषण पृथ्वी की सतह पर स्थानिक डेटा का विश्लेषण करने की एक विधि है।
  • यह हमें स्थानिक पैटर्न, संबंधों और प्रक्रियाओं को समझने में मदद करता है।
  • स्थानिक विश्लेषण के विभिन्न तरीके हैं, जैसे कि बफरिंग, ओवरले विश्लेषण और निकटता विश्लेषण।
  • स्थानिक विश्लेषण के कई अनुप्रयोग हैं, जिनमें भूमि उपयोग योजना, परिवहन योजना, पर्यावरण प्रबंधन और आपदा प्रबंधन शामिल हैं।

निष्कर्ष

इस अध्याय में, हमने भूगोल की परिभाषा, प्रकृति, शाखाओं, मानव और पर्यावरण के बीच के संबंधों और भूगोल के महत्व का अध्ययन किया। हमने भूगोल के अध्ययन के विभिन्न दृष्टिकोणों, अध्ययन के तरीकों और मानचित्रण और स्थानिक विश्लेषण जैसे महत्वपूर्ण उपकरणों का भी पता लगाया।

यहां कुछ मुख्य बातें हैं:

  • भूगोल पृथ्वी की सतह पर पाए जाने वाले प्राकृतिक और मानवीय तत्वों का अध्ययन है।
  • भूगोल एक अंतःविषय विषय है, जो प्राकृतिक विज्ञान और सामाजिक विज्ञान दोनों से जानकारी लेता है।
  • भूगोल की दो मुख्य शाखाएँ हैं: भौतिक भूगोल और मानव भूगोल।
  • मानव और पर्यावरण के बीच का संबंध भूगोल का एक केंद्रीय विषय है।
  • भूगोल आधुनिक दुनिया में एक महत्वपूर्ण विषय है, जो स्थानिक जागरूकता, समस्या-समाधान कौशल, पर्यावरण प्रबंधन और सतत विकास के लिए आवश्यक है।
  • मानचित्रण और स्थानिक विश्लेषण भूगोल के महत्वपूर्ण उपकरण हैं।

भूगोल एक गतिशील और विकसित होने वाला विषय है। यह हमें पृथ्वी और उस पर होने वाली घटनाओं के बारे में बेहतर ढंग से समझने में मदद करता है। भूगोल का अध्ययन हमें अधिक सूचित और जिम्मेदार नागरिक बनने में भी मदद करता है।

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