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Class 12 History Chapter 1 in Hindi: Notes & Solutions

Posted on January 27, 2026 by Anshul Gupta

कक्षा 12 इतिहास: ईंटें, मनके तथा अस्थियाँ – हड़प्पा सभ्यता

Table of Content
  • 1. कक्षा 12 इतिहास: ईंटें, मनके तथा अस्थियाँ – हड़प्पा सभ्यता
  • 2. हड़प्पा सभ्यता की खोज और उसका विस्तार
    • 2.1. सिंधु घाटी सभ्यता की खोज
    • 2.2. सभ्यता का भौगोलिक विस्तार
  • 3. शहर योजना और वास्तुकला
    • 3.1. शहरों की योजना
    • 3.2. वास्तुकला की विशेषताएं
  • 4. सामाजिक और आर्थिक जीवन
    • 4.1. सामाजिक जीवन
    • 4.2. आर्थिक जीवन
  • 5. राजनीतिक संगठन और शासन प्रणाली
  • 6. कला, शिल्प और प्रौद्योगिकी
    • 6.1. कला
    • 6.2. शिल्प
    • 6.3. प्रौद्योगिकी
  • 7. धर्म और धार्मिक विश्वास
  • 8. सभ्यता का पतन
  • 9. निष्कर्ष

कक्षा 12 इतिहास के अध्याय 1, “ईंटें, मनके तथा अस्थियाँ – हड़प्पा सभ्यता” में, हम सिंधु घाटी सभ्यता, जिसे हड़प्पा सभ्यता के नाम से भी जाना जाता है, का अध्ययन करेंगे। यह अध्याय प्राचीन भारतीय इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण अध्यायों में से एक है। इसमें हम इस सभ्यता की उत्पत्ति, विस्तार, शहर योजना, सामाजिक जीवन, आर्थिक गतिविधियाँ, राजनीतिक संगठन, कला, शिल्प और अंततः इसके पतन के बारे में विस्तार से जानेंगे। यह अध्याय आपको इस प्राचीन सभ्यता की जटिलताओं को समझने में मदद करेगा और उस समय के लोगों के जीवन की एक झलक देगा।

इस अध्याय में, आप निम्नलिखित विषयों का अध्ययन करेंगे:

  • हड़प्पा सभ्यता की खोज और उसका विस्तार
  • शहर योजना और वास्तुकला
  • सामाजिक और आर्थिक जीवन
  • राजनीतिक संगठन और शासन प्रणाली
  • कला, शिल्प और प्रौद्योगिकी
  • धर्म और धार्मिक विश्वास
  • सभ्यता का पतन

हड़प्पा सभ्यता की खोज और उसका विस्तार

सिंधु घाटी सभ्यता की खोज

सिंधु घाटी सभ्यता की खोज 1920 के दशक में हुई थी। दयाराम साहनी ने 1921 में हड़प्पा में और राखलदास बनर्जी ने 1922 में मोहनजोदड़ो में खुदाई की। इन खुदाईयों से इस प्राचीन सभ्यता के अवशेष मिले, जिससे भारतीय इतिहास में एक नए युग की शुरुआत हुई।

शुरुआती खोजों ने इस सभ्यता की शहरी प्रकृति और उन्नत जीवन शैली का खुलासा किया। इसके बाद, पुरातत्वविदों ने इस क्षेत्र में कई और स्थलों की खुदाई की, जिससे इस सभ्यता के बारे में हमारी समझ और गहरी हुई।

सभ्यता का भौगोलिक विस्तार

हड़प्पा सभ्यता का विस्तार आधुनिक पाकिस्तान, भारत और अफगानिस्तान के कुछ हिस्सों में था। इसका क्षेत्रफल लगभग 1.3 मिलियन वर्ग किलोमीटर था।

मुख्य स्थल
  • ✓हड़प्पा: पाकिस्तान में, सिंधु घाटी सभ्यता का पहला खोजा गया स्थल।
  • ✓मोहनजोदड़ो: पाकिस्तान में, एक बड़ा शहर जो अपनी उन्नत जल निकासी प्रणाली और विशाल स्नानागार के लिए जाना जाता है।
  • ✓लोथल: भारत के गुजरात में, एक महत्वपूर्ण बंदरगाह शहर।
  • ✓कालीबंगा: भारत के राजस्थान में, यहाँ से हल के निशान और अग्नि वेदियों के साक्ष्य मिले हैं।
  • ✓धोलावीरा: भारत के गुजरात में, अपनी अनूठी जल संचयन प्रणाली के लिए जाना जाता है।

इस विस्तार से पता चलता है कि यह सभ्यता एक विशाल क्षेत्र में फैली हुई थी और इसमें विभिन्न क्षेत्रों के बीच व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान होता था।

हड़प्पा सभ्यता का महत्व
उच्चतम: शहरीकरण
मध्यम: व्यापार और शिल्प
आधार: कृषि

शहर योजना और वास्तुकला

शहरों की योजना

हड़प्पा शहरों की योजना सुनियोजित थी, जो उनकी शहरी नियोजन कौशल को दर्शाती है। शहरों को दो भागों में विभाजित किया गया था: गढ़ (citadel) और निचला शहर।

  • गढ़: यह शहर का ऊपरी हिस्सा था, जो संभवतः शासकों और महत्वपूर्ण व्यक्तियों के लिए आरक्षित था। गढ़ में सार्वजनिक भवन और अन्य महत्वपूर्ण संरचनाएँ थीं।
  • निचला शहर: यह शहर का निचला हिस्सा था, जहाँ आम लोग रहते थे। यहाँ आवासीय भवन, दुकानें और अन्य सामान्य संरचनाएँ थीं।

शहरों में सड़कें ग्रिड पैटर्न में थीं, जो एक-दूसरे को समकोण पर काटती थीं। इससे शहरों में आवागमन आसान हो जाता था।

वास्तुकला की विशेषताएं

हड़प्पा वास्तुकला अपनी उन्नत तकनीकों और सौंदर्यशास्त्र के लिए जानी जाती है।

  • ईंटों का उपयोग: हड़प्पावासी पकी हुई ईंटों का उपयोग करते थे, जो मजबूत और टिकाऊ थीं।
  • जल निकासी प्रणाली: उनकी जल निकासी प्रणाली बहुत ही कुशल थी। घरों से निकलने वाला पानी नालियों के माध्यम से सड़कों के किनारे बने नालों में जाता था।
  • विशाल स्नानागार: मोहनजोदड़ो में विशाल स्नानागार एक महत्वपूर्ण संरचना थी, जिसका उपयोग संभवतः धार्मिक अनुष्ठानों के लिए किया जाता था।
  • भवन निर्माण: घरों में एक आंगन, कमरे और रसोई घर होते थे। कुछ घरों में शौचालय भी थे।
शहर योजना प्रक्रिया
1ग्रिड पैटर्न सड़कों का निर्माण

→

2गढ़ और निचले शहर का विभाजन

→

3ईंटों का उपयोग कर भवन निर्माण

→

4कुशल जल निकासी प्रणाली का निर्माण

सामाजिक और आर्थिक जीवन

सामाजिक जीवन

हड़प्पा समाज के बारे में जानकारी सीमित है, क्योंकि लिपि को अभी तक पूरी तरह से समझा नहीं जा सका है। हालाँकि, खुदाई से प्राप्त अवशेषों से हमें कुछ जानकारी मिलती है।

  • सामाजिक वर्ग: समाज में विभिन्न वर्ग थे, जिनमें शासक, व्यापारी, शिल्पकार और आम लोग शामिल थे।
  • परिवार: परिवार शायद समाज की सबसे छोटी इकाई थे।
  • पोशाक: लोग सूती और ऊनी कपड़े पहनते थे।
  • आभूषण: आभूषणों का उपयोग पुरुष और महिला दोनों करते थे, जिसमें मनके, हार, कंगन और अंगूठियाँ शामिल थीं।

आर्थिक जीवन

हड़प्पा सभ्यता की अर्थव्यवस्था कृषि, व्यापार और शिल्प पर आधारित थी।

  • कृषि: लोग गेहूँ, जौ, चावल, दालें और तिलहन उगाते थे। वे हल का उपयोग करते थे और सिंचाई के लिए नहरों और कुओं का उपयोग करते थे।
  • व्यापार: हड़प्पावासियों का व्यापार आंतरिक और बाहरी दोनों था। वे मेसोपोटामिया, मिस्र और अन्य क्षेत्रों के साथ व्यापार करते थे।
  • शिल्प: मिट्टी के बर्तन, मनके बनाना, धातु का काम और कपड़ा बनाना महत्वपूर्ण शिल्प थे।
सामाजिक और आर्थिक जीवन की तुलना
सामाजिक जीवनआर्थिक जीवन
मुख्य विशेषताएँसामाजिक वर्ग, परिवार, पोशाक, आभूषणकृषि, व्यापार, शिल्प
उदाहरणविभिन्न प्रकार के कब्रगाह, आभूषणगेहूँ, जौ, मेसोपोटामिया के साथ व्यापार, मिट्टी के बर्तन

राजनीतिक संगठन और शासन प्रणाली

हड़प्पा सभ्यता में राजनीतिक संगठन की प्रकृति के बारे में निश्चित जानकारी उपलब्ध नहीं है। इतिहासकारों का मानना है कि वहाँ एक केंद्रीकृत शासन प्रणाली थी, लेकिन इसकी प्रकृति अभी भी बहस का विषय है।

  • शासन का स्वरूप: यह संभव है कि हड़प्पा सभ्यता में एक शासक वर्ग था, जो शहरों और क्षेत्रों को नियंत्रित करता था।
  • प्रशासनिक व्यवस्था: शहरों को संभवतः प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा प्रबंधित किया जाता था, जो सड़कों, जल निकासी और अन्य सार्वजनिक सेवाओं का प्रबंधन करते थे।
  • एकजुटता: एक समान लिपि, शहरी योजना और बाटों और मापों का उपयोग इस सभ्यता में एकरूपता का सुझाव देते हैं।
संभावित शासन संरचना
केंद्रीय शासन
↓
प्रांतीय प्रशासन
शहर प्रशासन

कला, शिल्प और प्रौद्योगिकी

कला

हड़प्पा कला अपनी विविधता और सुंदरता के लिए जानी जाती है।

  • मूर्तियाँ: हड़प्पावासी पत्थर, धातु और मिट्टी से मूर्तियाँ बनाते थे। मोहनजोदड़ो से प्राप्त नर्तकी की मूर्ति एक प्रसिद्ध उदाहरण है।
  • मुहरें: मुहरें, जो आमतौर पर स्टीएटाइट से बनी होती थीं, जानवरों, मनुष्यों और प्रतीकों को दर्शाती थीं। इन मुहरों का उपयोग व्यापार और प्रशासनिक उद्देश्यों के लिए किया जाता था।
  • मिट्टी के बर्तन: हड़प्पावासी विभिन्न प्रकार के मिट्टी के बर्तन बनाते थे, जिन पर लाल और काले रंग से चित्रकारी की जाती थी।

शिल्प

हड़प्पा शिल्प अपनी उन्नत तकनीकों और कौशल के लिए प्रसिद्ध हैं।

  • मनके बनाना: मनके विभिन्न प्रकार की सामग्रियों, जैसे कि पत्थर, धातु और मिट्टी से बनाए जाते थे।
  • धातु का काम: हड़प्पावासी तांबा, कांस्य, सोना और चांदी का उपयोग करते थे।
  • कपड़ा बनाना: हड़प्पावासी सूती और ऊनी कपड़े बनाते थे।

प्रौद्योगिकी

हड़प्पावासी उन्नत प्रौद्योगिकियों का उपयोग करते थे।

  • ईंट बनाना: उन्होंने पकी हुई ईंटों का उपयोग किया, जो मजबूत और टिकाऊ थीं।
  • जल निकासी प्रणाली: उनकी जल निकासी प्रणाली बहुत ही कुशल थी।
  • बाट और माप: वे बाटों और मापों की एक मानकीकृत प्रणाली का उपयोग करते थे।
कला
  • मूर्तियाँ (नर्तकी की मूर्ति)
  • मुहरें (जानवरों और प्रतीकों के साथ)
  • मिट्टी के बर्तन
शिल्प और प्रौद्योगिकी
  • मनके बनाना
  • धातु का काम
  • कपड़ा बनाना
  • ईंट बनाना
  • जल निकासी प्रणाली
  • बाट और माप

धर्म और धार्मिक विश्वास

हड़प्पा सभ्यता के धार्मिक विश्वासों के बारे में जानकारी सीमित है, क्योंकि लिपि को अभी तक पूरी तरह से समझा नहीं जा सका है। हालाँकि, खुदाई से प्राप्त अवशेषों से हमें कुछ जानकारी मिलती है।

  • मातृ देवी की पूजा: मातृ देवी की मूर्तियाँ मिली हैं, जिससे पता चलता है कि मातृ देवी की पूजा की जाती थी।
  • पुरुष देवता: पशुपति महादेव की मुहर एक महत्वपूर्ण धार्मिक प्रतीक है।
  • प्रकृति की पूजा: पेड़, जानवरों और अन्य प्राकृतिक तत्वों की पूजा की जाती थी।
  • अग्नि वेदियों: कालीबंगा और लोथल में अग्नि वेदियों के साक्ष्य मिले हैं, जो धार्मिक अनुष्ठानों का संकेत देते हैं।

हड़प्पा धर्म की प्रकृति जटिल थी, जिसमें मातृ देवी, पुरुष देवता और प्रकृति की पूजा शामिल थी।

पशुपति महादेव
एक देवता जिसे योग मुद्रा में बैठे हुए चित्रित किया गया है, जिसके चारों ओर जानवर हैं। यह शिव के प्रारंभिक रूप का प्रतिनिधित्व करता है।

सभ्यता का पतन

हड़प्पा सभ्यता के पतन के कारण अभी भी बहस का विषय है। कई सिद्धांत हैं, लेकिन कोई भी एक सिद्धांत पूरी तरह से स्वीकार नहीं किया जाता है।

  • जलवायु परिवर्तन: जलवायु में बदलाव, जैसे कि सूखा या बाढ़, कृषि को प्रभावित कर सकता है और सभ्यता के पतन का कारण बन सकता है।
  • नदियों का सूखना: नदियों का मार्ग बदलना या सूखना, शहरों को पानी की आपूर्ति को प्रभावित कर सकता है।
  • विदेशी आक्रमण: कुछ इतिहासकारों का मानना है कि आर्यों का आक्रमण भी पतन का कारण हो सकता है।
  • अतिदोहन: संसाधनों का अतिदोहन, जैसे कि वनों की कटाई, पर्यावरण को नुकसान पहुंचा सकता है और सभ्यता को कमजोर कर सकता है।

निष्कर्ष

हड़प्पा सभ्यता, जो सिंधु घाटी सभ्यता के रूप में भी जानी जाती है, प्राचीन भारतीय इतिहास की एक महत्वपूर्ण सभ्यता थी। यह अपनी उन्नत शहरी योजना, कुशल जल निकासी प्रणाली, कला, शिल्प और व्यापार के लिए जानी जाती है।

मुख्य बातें
  • हड़प्पा सभ्यता की खोज 1920 के दशक में हुई थी।
  • यह सभ्यता आधुनिक पाकिस्तान, भारत और अफगानिस्तान में फैली हुई थी।
  • शहर योजना सुनियोजित थी, जिसमें गढ़ और निचला शहर शामिल थे।
  • अर्थव्यवस्था कृषि, व्यापार और शिल्प पर आधारित थी।
  • धर्म में मातृ देवी, पुरुष देवता और प्रकृति की पूजा शामिल थी।
  • सभ्यता के पतन के कई कारण हो सकते हैं, जिनमें जलवायु परिवर्तन, नदियों का सूखना और विदेशी आक्रमण शामिल हैं।

इस अध्याय में आपने हड़प्पा सभ्यता के बारे में विस्तार से जाना। यह सभ्यता प्राचीन भारत की एक महत्वपूर्ण सभ्यता थी, जिसने शहरीकरण, व्यापार और कला के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इस सभ्यता का अध्ययन हमें प्राचीन इतिहास को समझने में मदद करता है।

आगे क्या करें? इस अध्याय को अच्छी तरह से दोहराएँ और महत्वपूर्ण तिथियों, स्थानों और अवधारणाओं को याद रखें। आप इस विषय पर अधिक जानकारी के लिए अन्य स्रोतों का भी उपयोग कर सकते हैं।

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